कोविड-19 की वजह से टू-व्हीलर की बिक्री में हो सकती है बढ़ोतरी, सोशल डिस्टेंसिंग बनेगा बड़ा कारण

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  • देश में 1 अप्रैल से BS6 नोर्म्स वाली गाड़ियां चलाना ही अनिवार्य हो गया है
  • 25 मार्च से शुरू हुआ लॉकडाउन अब 17 मई तक बढ़ा दिया गया है

दैनिक भास्कर

May 01, 2020, 09:50 PM IST

नई दिल्ली. देश की ऑटो इंडस्ट्री की हालत चिंताजनक है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है किसी महीने में एक भी कार नहीं बिकी। बता दें कि देश में नेशनल लॉकडाउन के चलते किसी भी कंपनी की कोई कार नहीं बिकी है। वहीं, आने वाले कुछ महीनों में कार की बिक्री पर असर रहेगी। हालांकि, ऑटोकार की रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन के बाद दो पहिया वाहनों की बिक्री बढ़ सकती है। बता दें कि देश में 1 अप्रैल से BS6 नोर्म्स वाली गाड़ियां चलाना ही अनिवार्य हो गया है। पहले ऐसा माना जा रहा था कि BS4 इंजन से BS6 इंजन पर स्विच करने से टू-व्हीलर की सेल पर असर होगा, क्योंकि इससे गाड़ी की कीमत में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन अब कोविड-19 के चलते इसकी बिक्री में तेजी देखने को मिल सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक ये साल टू-व्हीलर की बिक्री के लिए अब तक अच्छा नहीं रहा। पहले जहां BS6 इंजन के चलते टू-व्हीलर की कीमतें बढ़ी। तो अब कोविड-19 महामारी के चलते गाड़ियों की ब्रिकी पूरी तरह रुक गई। ऐसा माना जा रहा है कि फेस्टिव सीजन तक राहत की उम्मीद नहीं है। हालांकि, लॉकडाउन हटने के बाद कोविड के कारणों से ही टू-व्हीलर की बिक्री में बढ़ोतरी देखने को मिलगी। बता दें कि 25 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन को तीन अलग-अलग फेज में 17 मई तक बढ़ा दिया गया है।

  • कोविड-19 से बचने के लिए वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन और सरकार की तरफ से जो एडवाइजरी जारी की गई है, उसके मुताबिक इस महामारी से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का फॉलो करना जरूरी है। ऐसे में लोग खुद को सेफ करने के लिए दूसरे लोगों से डिस्टेंस बनाकर रखेंगे। यानी वे पब्लिक ट्रांसपोर्ट से दूरी बनाकर रखना चाहेंगी। वहीं, रोजमर्रा के काम निपटाने और ऑफिस आने-जाने के लिए टू-व्हीलर अच्छा विकल्प बना सकता है।
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर रोजाना सैंकड़ों लोग सफर करते हैं। ऐसी स्थिति में वे सफल के लिए कितने सुरक्षित रहेंगे, इस बात को अभी समझ पाना थोड़ा मुश्किल है। देश का बड़ा वर्ग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करता है। ऐसे में जब वो इसका इस्तेमाल करने से बचेगा तब उसके पास टू-व्हीलर सबसे अच्छा विकल्प होता है, क्योंकि वो कार की तुलना में इसे आसानी से खरीद सकता है। वहीं, कार की तुलना में टू-व्हीलर का माइलेज ज्यादा और मेंटेनेंस कम होता है।
  • पिछले दो महीने में टू-व्हीलर की बिक्री के आंकड़े भी निराशाजनक हैं। वहीं, आने वाले कुछ महीने या लॉकडाउन के रहने तक ये आंकड़े मैन्युफैक्चरर्स को निराश कर सकते हैं। ऐसे में टू-व्हीलर कंपनियां घाटे से बचने के लिए ग्राहकों के लिए कुछ ऑफर्स भी लेकर आ सकती हैं। 
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अप्रैल महीने में एक भी कार नहीं बिकी। इस पर फाडा (फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) प्रेसिडेंट आशीष हर्षराज काले ने कहा, “लॉकडाउन के चलते नई गाड़ियों के बिक्री पूरी तरह बंद है। जो भी गाड़ियों लॉकडाउन से पहले बेची गई थी, सिर्फ आरटीओ में उनकी की प्रॉसेस पूरी हो रही है। आने वाले महीनों में भी हमारे लिए मुश्किल समय होगा। क्योंकि जब भी हमने स्लोडाउन या मंदी को फेस की है, तब वो डिमांड साइट से ही होती है। लेकिन इस बार 3 से 4 तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। जैसे, लॉकडाउन खुलते ही डिमांड कम रहेगी। इकोनॉमिक स्थिति कैसी रहती है इसका पता भी बाद में ही चलेगा। सप्लाई की तरफ से भी सपोर्ट नहीं मिल पाएगा, क्योंकि सभी प्रोजेक्ट को दिन-रात के लिए शुरू नहीं किया जा सकता। हो सकता है कि पहले 2 या 3 जोन ही खुलें। ऐसे में यदि कोई कम्पोनेंट मैन्युफैक्चर रेड जोन में हुआ तब भी गाड़ी का प्रोडक्शन शुरू नहीं हो पाएगा। लॉकडाउन खुलने के बाद सप्लाई की क्या स्थिति बनती है, ये आगे ही पता चलेगी।”

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