मास्क लगाकर लॉन्ग ड्राइव कितनी सुरक्षित, इन जरूरी बातों को न करें नजरअंदाज

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वाहन ड्राइविंग, रनिंग के दौरान मास्क लगाने वाले लोगों के होश खोने और फेफड़े फट जाने तक के मामले सामने आए हैं। ऐसे में अहम सवाल है कि कौन सा मास्क पहने और रनिंग, लंबी दूरी की ड्राइविंग के दौरान मास्क को किस तरह से उपयोग किया जाए, ताकि गंभीर समस्या से बचा जा सके। 
कितना सुरक्षित है एन-95 मास्क
कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ने के साथ ही बाजार में पीपीई किट्स और मास्क बनाने वाली कंपनियों की बाढ़ आ गई है। भारत भी अब बड़ी मात्रा में पीपीई किट्स और मास्क बनाने लगा है। इनके उपयोग से कोरोना संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा किया जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास एन-95 मास्क के प्रमाणन की कोई उचित व्यवस्था नहीं है जिसके कारण बाजार में उपलब्ध कई कंपनियों के मास्क उचित गुणवत्ता के नहीं हो सकते हैं। ऐसे मास्क के उपयोग से लोगों में सुरक्षित होने का गलत भाव पैदा होता है और वे संक्रमण के प्रति लापरवाह हो जाते हैं। इसका परिणाम होता है कि संवेदनशील जगहों पर काम करने वाले लोग मास्क पहनने के बाद भी कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं। 
मास्क से हुए ये नुकसान
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक न्यू जर्सी के लिंकन पार्क में पिछले महीने 23 अप्रैल को एक कार दुर्घटना की शिकार हो गई। कार ड्राइवर गाड़ी को लेकर एक खंभे से टकरा गया। इस घटना की तफ्तीश करनेवाले पुलिसकर्मियों का कहना था कि इस घटना के लिए कार चालक ने फेस मास्क को जिम्मेदार ठहराया। कार चालक का कहना था कि काफी लंबे वक्त तक एन-95 मास्क पहने हुए था। कार चलाने के दौरान अचानक से संतुलन खो बैठा और खंभे से जा टकराया। 

रिपोर्ट के मुताबिक एक अन्य घटना में कोरोना वायरस का केंद्र रहे चीन के वुहान में कुछ समय पहले एक व्यक्ति के फेफड़े फट गए। खबरों के मुताबिक वह व्यक्ति मास्क पहनकर रनिंग कर रहा था। मास्क पहनकर तीन मील तक दौड़ने की वजह से उस व्यक्ति के फेफड़ों में दबाव बढ़ गया था और वह फट गए। 
इन घटनाओं के पीछे क्या है वजह
National Institute of Health (राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान) के अनुसार लंबे समय तक मास्क पहनने और रनिंग के समय मास्क पहने रखना खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर बताते हैं कि हम सांस लेते हैं तो हमारे फेफड़ों में ऑक्सिजन जाता है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलता है। मास्क पहनने के दौरान भी यह होता रहता है। मास्क पहने हुए जब हम सांस छोड़ते हैं, तो उसमें कार्बन डाइऑक्साइड होता है और वह काफी देर तक उसमें रहता है। इस तरह हमारे सांस लेने के दौरान मास्क में ऑक्सीजन की कमी होती चली जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती जाती है। फिर ऑक्सीजन के साथ-साथ कार्बन डाइऑक्साइड भी सांस के रूप में अंदर जाती है। बता दें कि कार्बन डाइऑक्साइड में हाइपरकेनिया होता है जिससे सिरदर्द, चक्कर आना, दौरा पड़ना और कान बजना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 
कौन सी मास्क पहनें 
एन-95 मास्क
किसी भी वायरस के संक्रमण से बचने के लिए एन-95 मास्क सबसे बेहतर माना जाता है। एन-95 में N का अर्थ मास्क के तैलीय कणों को रोकने से होता है और इसके साथ जुड़ा अंक कणों के साइज को इंगित करता है। एन-95 मास्क वायु में उपलब्ध 0.3 माइक्रॉन या इससे अधिक मोटाई के किसी भी कण को बाहर ही रोकने में सक्षम होता है। 

एन-95 मास्क की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह मुंह पर पूरी तरह फिट बैठ जाता है। मुंह के आसपास कोई भी खुली जगह न होने के कारण किसी भी दिशा से कोई संक्रमण शरीर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाता है। इसे पहनने के बाद डॉक्टर या मरीज संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति को एन 95 मास्क पहनने की आवश्यकता नहीं है। इसमें अन्य मास्क की तुलना में सांस लेने के लिए थोड़ा जोर लगाना पड़ता है। 
सर्जिकल मास्क
सर्जिकल मास्क सामान्य तौर पर डॉक्टर, नर्स और मरीजों के द्वारा पहना जाता है। इसे पहनने से वायु में मौजूद बड़े सूक्ष्म कणों से रक्षा हो जाती है। यह बैक्टीरिया को शरीर में प्रवेश करने से रोकने के लिहाज से बेहतर माना जाता है। लेकिन यह बहुत महीन वायरस या धूल कणों को रोकने में सक्षम नहीं होता है।
इसकी सबसे बड़ी कमी यह होती है कि यह चारों ओर से खुला होता है। इसलिए सीधे संक्रमण को रोकने के बाद भी आसपास के संक्रमण से पूरी तरह रक्षा नहीं हो पाती है। यही कारण है कि ज्यादा संवेदनशील मामलों में स्वास्थ्यकर्मी इसे पहनने से परहेज करते हैं। 
क्या कहते हैं डॉक्टर
लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि जो दिल के मरीज हैं, वे खास तौर पर लंबे समय तक मास्क नहीं पहने। साथ ही सैर करने के समय भी ज्यादा देर तक मास्क नहीं पहनें। इससे दिल पर दबाव पड़ता है।

दौड़ते समय बरतें ये सावधानियां 

  • ऐसा मास्क पहने जिसमें सांस लेने में आसानी हो
  • एन 95 मास्क ना पहनें, इससे घुटन होगी
  • दिल के मरीज मास्क पहनकर जॉगिंग या दौड़ ना लगाएं
  • ट्रेडमिल या अन्य शारीरिक गतिविधि के दौरान मास्क ना पहनें
  • मास्क से घुटन हो सकती है, लेकिन हार्ट अटैक होने की संभवाना कम है
  • मौत का कारण बन सकती है 

लंबी दूरी तक करनी है ड्राइव तो ये सावधानी जरूरी

  • गाड़ी में ज्यादा लोग सवार हैं तो सभी कोई मास्क जरूर पहनें
  • गाड़ी के शीशे खोल सकते हैं
  • कुछ समय के अंतराल में गाड़ी से उतरकर सभी लोग खुली हवा में सांस लें
  • एन 95 मास्क नहीं पहनें
  • घर के बने मास्क या फिर सर्जिकल व अन्य मास्क पहनें
  • मास्क ज्यादा कसा हुआ नहीं होना चाहिए
  • अगर तबियत खराब लग रही हो तो मास्क उतार दें

सार

Covid-19 (कोरोना वायरस) संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कई दिशानिर्देशों में फेस मास्क पहनना भी शामिल है। घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनना अनिवार्य है। दुनियाभर में लोग कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए फेस मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन लंबे समय तक फेस मास्क पहनने से लोगों को गंभीर परेशानी का भी सामना करना पड़ा है।

विस्तार

वाहन ड्राइविंग, रनिंग के दौरान मास्क लगाने वाले लोगों के होश खोने और फेफड़े फट जाने तक के मामले सामने आए हैं। ऐसे में अहम सवाल है कि कौन सा मास्क पहने और रनिंग, लंबी दूरी की ड्राइविंग के दौरान मास्क को किस तरह से उपयोग किया जाए, ताकि गंभीर समस्या से बचा जा सके। 

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Devesh Tyagi

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